मांदागिरी में पर्यटन विकास के प्रस्ताव पर हुई चर्चा, सड़क-पुल निर्माण से आवागमन सुगम बनाने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
धमतरी। धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और ग्रामीण आजीविका की अपार संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने गुरुवार को नगरी विकासखंड के वनांचल एवं उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत मांदागिरी स्थित प्राचीन गौतम ऋषि पहाड़ का भ्रमण किया। पूजा-अर्चना की ।इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र में पर्यटन विकास, आवागमन की सुविधा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। भ्रमण में वनमंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
पहाड़ की चढ़ाई के दौरान ग्रामीण महिलाओं से किया संवाद
गौतम ऋषि पहाड़ की ओर जाते समय कलेक्टर श्री मिश्रा ने ग्रामीण महिलाओं से मुलाकात कर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि प्राप्त होने, आंगनबाड़ी केंद्रों की सेवाओं तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन की उपलब्धता के संबंध में पूछताछ की। महिलाओं ने स्थानीय समस्याओं से अवगत कराते हुए सोंढुर नदी पर पुल निर्माण की मांग रखी, ताकि नदी पार करने और आसपास के गांवों तक आने-जाने में सुविधा हो सके। कलेक्टर ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना तथा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं के विकास के संबंध में चर्चा की।
गौतम ऋषि पहाड़ के पर्यटन विकास के लिए समिति ने सौंपा प्रस्ताव
इस अवसर पर जय गौतम ऋषि सेवा समिति, मांदागिरी की ओर से गौतम ऋषि पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव सौंपा गया। समिति के अध्यक्ष श्री मंगल सिंह नाग ने बताया कि गंगरेल डुबान क्षेत्र और दुर्गम वनांचल के पर्यटन स्थलों के भ्रमण तथा पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने क्षेत्र के समग्र विकास की रूपरेखा तैयार की है।
प्रस्ताव में गौतम ऋषि पहाड़ तक लगभग 12 किलोमीटर लंबे इको-ट्रैकिंग मार्ग के विकास, पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के विस्तार तथा नगरी-करका-मांदागिरी से मेचका तक लगभग 55 किलोमीटर बारहमासी सड़क निर्माण की मांग शामिल है। इसके साथ ही सोंढुर नदी एवं आमकड़ा नदी पर उच्चस्तरीय पुल-पुलियों के निर्माण का सुझाव दिया गया है। समिति के अनुसार, इन सुविधाओं के विकसित होने से बरसात के दौरान आवागमन में होने वाली कठिनाइयां कम होंगी और 15 से अधिक गांवों के लोगों को लाभ मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क और पुल के अभाव में बारिश के मौसम में क्षेत्र का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होता है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी होती है। पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय आदिवासी युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे तथा अन्य पर्यटन आधारित आजीविका के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए बुनियादी सुविधाओं के विकास, सुगम आवागमन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से वनांचल में विकास की नई संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।




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