कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने AWD तकनीक के विस्तार के साथ दलहन-तिलहन का रकबा दोगुना करने पर दिया जोर
धमतरी। जिले में कृषि को अधिक टिकाऊ, जल संरक्षण आधारित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से वैकल्पिक जल प्रबंधन पद्धति अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (Alternate Wetting and Drying–AWD) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कृषि विभाग एवं परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक क्षेत्रों में AWD तकनीक का विस्तार करते हुए 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। गांव में AWD तकनीक के अंतर्गत पात्र किसानों की लगभग 95 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग, प्रशिक्षण एवं क्रियान्वयन संबंधी कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इस प्रगति को देखते हुए जोरातराई नवीन को कार्बन न्यूट्रल गांव के मॉडल के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है।
बैठक में कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा वर्तमान क्षेत्रफल की तुलना में दोगुना करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही किसानों को उपज की बिक्री में सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों तथा खरीदी से जुड़ी संस्थाओं की संख्या और कार्यक्षेत्र बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। जिन समितियों अथवा संस्थाओं के माध्यम से कृषि उपज की खरीदी की जाती है, वहां आवश्यक अधोसंरचना एवं व्यवस्थाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि दलहन-तिलहन उत्पादक किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार सुविधा मिल सके।
कलेक्टर ने दिए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
कलेक्टर श्री मिश्रा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक क्षेत्रों का चिन्हांकन कर पात्र किसानों को योजनाबद्ध तरीके से AWD पद्धति से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और गांव में चल रही गतिविधियों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करें।
उन्होंने अधिकारियों को दलहन एवं तिलहन का रकबा दोगुना करने के लिए ग्रामवार कार्ययोजना तैयार करने, किसानों को उन्नत बीज एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खरीदी और विपणन की व्यवस्था मजबूत करना भी आवश्यक है। इसके लिए सहकारी समितियों एवं खरीदी संस्थाओं की संख्या बढ़ाने, आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए।
बैठक में उप संचालक कृषि मोनेश साहू, MANKHE Pvt. Ltd. के प्रतिनिधि श्री सावन शर्मा, PRITHU के प्रतिनिधि अभय तोमर, संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
जल संरक्षण के साथ पर्यावरणीय लाभ की पहल
AWD पद्धति में खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय निर्धारित अंतराल पर खेत की नमी एवं जलस्तर के अनुसार सिंचाई की जाती है। इससे सिंचाई जल का अधिक कुशल उपयोग करने में मदद मिलती है। धान के खेतों में पानी के प्रबंधन में बदलाव से मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने की भी संभावना रहती है।
जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने के साथ जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने, खरीदी समितियों एवं संस्थाओं का विस्तार करने और किसानों को बेहतर बाजार सुविधा उपलब्ध कराने की योजना से कृषि क्षेत्र में विविधीकरण और टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।




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