NEWS UPDATES

6/recent/ticker-posts

Notice: उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं और सहायक संचालक मछलीपालन विभाग को कारण बताओ नोटिस

 


धमतरी। जिले के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा काम में कोई कोताही बरतना नहीं चाहते हैं। हर विभाग में कसावट उनकी प्राथमिकता है।इसी सिलसिले में पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उपसंचालक और मछली पालन विभाग के सहायक संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है

जिले में कृत्रिम गर्भाधान एवं वत्सोत्पादन कार्यक्रमों में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध कम उपलब्धि और राज्य स्तर पर जिले की कमजोर रैंकिंग को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अवधेश मरकाम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के तीन दिवस के भीतर बिंदुवार तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


कृत्रिम गर्भाधान एवं वत्सोत्पादन कार्यक्रम पशुधन की नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालकों की आय संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि प्रथम दृष्टया यह स्थिति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन की श्रेणी में विचारणीय है। निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उच्च कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।


न्यून प्रगति पर सहायक संचालक को कारण बताओ नोटिस

जिले में मछलीपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध न्यून प्रगति तथा हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित उपलब्धि नहीं होने पर कलेक्टर ने सहायक संचालक, मछलीपालन एम.एस. कमल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के तीन दिवस के भीतर सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

नोटिस में मत्स्य अंगुलिकाओं के संचयन में 700 इकाई के लक्ष्य के विरुद्ध 450 इकाई की उपलब्धि तथा झींगा पालन सहायता योजना में 50 इकाई के लक्ष्य के विरुद्ध शून्य उपलब्धि पर भी असंतोष व्यक्त किया गया है। वहीं, मत्स्य कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड से लाभान्वित करने के लिए निर्धारित 8,500 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,053 प्रकरण प्रस्तुत और 516 प्रकरण स्वीकृत होना दर्शाया गया है। फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के अंतर्गत एक्वा इंश्योरेंस एवं अधोसंरचना निर्माण से संबंधित प्रकरणों में भी शून्य उपलब्धि पाई गई है।


निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने अथवा जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उच्च कार्यालय को लेख किए जाने की चेतावनी दी गई है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ