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विहंगम योग संत समाज के 100 वें वार्षिकोत्सव को इस वर्ष शताब्दी समारम्भ महोत्सव के रूप में वाराणसी में मनाया जाएगा

 

रायपुर।विहंगम योग संत समाज के 100 वें वार्षिकोत्सव को इस वर्ष " शताब्दी समारम्भ महोत्सव" के रूप में 17 एवं 18 दिसम्बर 2023 (मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमी, षष्ठी) को स्वर्वेद महामन्दिर धाम, उमरहाँ, वाराणसी में बहुत ही भव्यता एवं दिव्यता के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर विशालतम 25000 कुण्डीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का वृहद् आयोजन किया जाएगा।

भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में बन रहे वृहद् साधना केन्द्र, स्वर्वेद महामन्दिर धाम के निर्माणार्थ, महामन्दिर के ही प्रांगण में आयोजित, विशालतम " स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ" में आपका स्वागत है । 25,000 हवन कुण्डों के इस वैदिक महायज्ञ में आहुति देने लाखों की संख्या में सेवाभावी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

हम भूल न जायें, जीवन अल्प है। जिन्दगी जीने में ही जिन्दगी बीत जाती है । जीवन की सार्थकता सेवा में है। यह कार्यक्रम सेवा का एक दुर्लभ अवसर हैसद्गुरु-सेवा, सत्संग एवं साधना से इस संसार में हमें धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों फलों की निश्चय ही प्राप्ति हो जाती है और यज्ञ तो समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति का माध्यम है ही । इस कार्यक्रम में ब्रह्म - आधार से आहूत, यज्ञ के दुर्लभ एवं अमोघ वेदमन्त्रों से हमारी अंतरात्मा गुंजायमान होने वाली है। इस परम पावन शताब्दी समारम्भ महोत्सव में विहंगम योग के प्रणेता सद्गुरु सदाफलदेव महाराज की पावन मूर्ति के भव्य एवं दिव्य निर्माण का शिलान्यास भी होगा । ऐसा अद्भुत, ऐतिहासिक एवं दुर्लभ कार्यक्रम है यह -"शताब्दी समारम्भ महोत्सव एवं 25000 कुण्डीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ" ।

यह  सौभाग्य का विषय है कि उक्त आयोजन के निमित्त सुपूज्य सन्त प्रवर श्री विज्ञानदेव ज महाराज इस पुनीत संकल्प अभियान के साथ स्वयं आपके क्षेत्र में पधारने जा रहे हैं । सन्त प्रवर श्री की संगीतमय 'जय स्वर्वेद कथा' हृदय में स्वर्वेद का विमल ज्ञान प्रवाहित कर देती है। उनके सान्निध्य में विहंगम योग ध्यान-साधना हमें सहज ही दिव्य अनुभवों की ओर ले चलती है।

विहंगम योग संत समाज, नवापारा राजिम, जिला रायपुर ने बताया कि कार्यक्रम में सन्त प्रवर विज्ञानदेव महाराज की दिव्यवाणी, दर्शन - सान्निध्य के साथ-साथ उनके कर-कमलों से प्रसाद प्राप्त करने का सौभाग्य सभी संकल्पकर्त्ताओं को मिलेगा। सेवा, सत्संग और साधना की इस त्रिवेणी में हम सपरिवार उपस्थित होकर जीवन के सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर हों।


 

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