रुद्री में आयोजित दुर्लभ सत्संग एवं प्रवचन श्रृंखला का चौथा दिन
धमतरी।आमंत्रण हेरिटेज स्थित साहू सदन, रुद्री में आयोजित दुर्लभ सत्संग एवं प्रवचन श्रृंखला का चौथा दिवस श्रद्धेय स्वामी विजयानंद गिरि जी महाराज (ऋषिकेश वाले) के पावन सान्निध्य में भावपूर्ण वातावरण के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर आसपास के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों से पहुँचे सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अपने प्रवचन में श्रद्धेय स्वामी विजयानंद गिरि जी महाराज ने माता-पिता की सेवा को जीवन का सर्वोच्च धर्म बताते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा से जीवन में सुख, शांति और ईश्वर की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि जिस घर में माता-पिता का सम्मान होता है, वहाँ सदैव सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है।
स्वामी जी ने गृहस्थ जीवन की मर्यादा और दायित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री को अपने पति की सेवा प्रेम और समर्पण भाव से करनी चाहिए तथा पति का भी यह कर्तव्य है कि वह पत्नी के सम्मान के साथ परिवार की सेवा करे। पति-पत्नी के आपसी सहयोग, त्याग और समझ से ही परिवार सुदृढ़ बनता है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी भगवत प्राप्ति संभव है। यदि व्यक्ति निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए ईश्वर का स्मरण करता रहे, तो जीवन सार्थक बन जाता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा जानकारी दी गई कि यह सत्संग एवं प्रवचन श्रृंखला आगामी तीन दिवस तक और चलेगी। उन्होंने आसपास के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सत्संग का लाभ लेने का आग्रह किया।
सत्संग के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय रहा और श्रद्धालुओं ने प्रवचनों से आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की। अंत में सभी ने स्वामी विजयानंद गिरि जी महाराज का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन को धर्म और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करने का संकल्प लिया।




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