भूपेंद्र साहू
धमतरी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)के प्रतिष्ठित युविका-2026 कार्यक्रम में धमतरी जिले के दो विद्यार्थियों का चयन हुआ है, दोनों ही केंद्रीय विद्यालय से हैं। एक कुरूद से नेहा साहू और दूसरा धमतरी से मयंक साहू का चयन हुआ है।दोनो ने न केवल धमतरी जिले का मान बढ़ाया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि छत्तीसगढ़ के छोटे कस्बों में भी वैश्विक स्तर के वैज्ञानिक बनने का जूनून है। दोनों को बधाइयां दी जा रही है।दोनों को मई माह में 15 दिन के लिए इसरो संस्थान भेजा जाएगा।
कुरूद की नेहा को मिल रही बधाई
कुरुद की माटी की सोंधी महक अब अंतरिक्ष के गलियारों में गूँजने को तैयार है। जब देश के चुनिंदा मेधावियों की सूची में पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय की छात्रा नेहा साहू पिता चन्द्रशेखर साहू का नाम दर्ज हुआ, तो यह महज एक छात्र का चयन नहीं था बल्कि यह छत्तीसगढ़ की उस नई पीढ़ी के आत्मविश्वास की जीत थी। उनकी इस सफलता ने कुरुद को शिक्षा और विज्ञान के मानचित्र पर एक नई चमक प्रदान की है। नेहा अब इसरो के केंद्रों में विशेषज्ञों से रॉकेट तकनीक, उपग्रहों की कार्यप्रणाली और अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां सीखेंगी। विज्ञान शिक्षक गणेश राम कावड़े और उनकी पूरी टीम रेणु त्रिपाठी, हिमांशु त्रिपाठी, नेम सिंह के मार्गदर्शन और प्राचार्या ग्लोरिया मिंज के नेतृत्व ने नेहा के सपनों को पंख मिला।नेहा ने कहा कि उसे बचपन से ही तारों की दुनिया आकर्षित करती थी। शिक्षकों के मार्गदर्शन में यह मुकाम हासिल किया।
विधायक ओंकार साहू ने दी मयंक को बधाई
इसी तरह केंद्रीय विद्यालय लोहरसी में अध्यनरत मयंक साहू पिता चुरामन साहू का भी चयन हुआ है। सूचना मिलते ही धमतरी विधायक ओंकार साहू उनके निज निवास पहुंचकर उन्हें बधाई दी। उनके पिता पॉलिटेक्निक में प्रयोगशाला टेक्नीशियन हैं। इस दौरान उपसरपंच शुभम साहू सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।
दोनों विद्यार्थियों को जिला साहू संघ के मीडिया प्रभारी डॉ भूपेंद्र साहू ने भी बधाई देते हुए कहा कि यह समाज के लिए गौरव का विषय है कि इतनी बड़ी उपलब्धि में साहू समाज के दो विद्यार्थी शामिल हुए।
क्या है ये कार्यक्रम
इसरो युविका (YUva VIgyani KAryakram) स्कूली छात्रों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक 15-दिवसीय, पूरी तरह से मुफ्त आवासीय इंटर्नशिप कार्यक्रम है, जो बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। यह "कैच देम यंग" (युवाओं को विज्ञान से जोड़ना) के तहत आयोजित किया जाता है, जिसमें इसरो के विभिन्न केंद्रों पर वैज्ञानिकों के साथ बातचीत और लैब विजिट शामिल है।





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