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DMT: सुखसागर वृद्धजन सदन का शिलान्यास... जरुरत मंद बुजुर्ग को मिलेगा सहारा.....

 


धमतरी। समाजसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सुखसागर वृद्धजन सदन का शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया।समाजसेवी रितुराज पवार की पहल पर शुरू हो रहे इस वृद्धाश्रम का उद्देश्य जरूरतमंद, बेसहारा और असहाय बुजुर्गों को सुरक्षित आश्रय और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है। शुक्रवार को शिलान्यास कार्यक्रम आचार्य पं. श्रीहित आकाश महाराज वृन्दावन के पावन सानिध्य में विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।सुखसागर वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के लिए रहने की सुविधा के साथ-साथ पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा,जिससे वे अपने जीवन का शेष समय सुकून और गरिमा के साथ बिता सकें।इस पहल को क्षेत्र में मानवता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।स्थानीय लोगों ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक बड़ी सौगात बताया है।


वृद्धा सदन के भूमि पूजन में पहुंचे श्रीहित आकाश जी महाराज ने बताया रितुराज फाउंडेशन की ओर से समाज के कल्याण के लिए सुंदर व पुण्य कार्य होते रहे हैं,और सुखसागर वृद्धा सदन को लेकर बीड़ा उठाया है। जिसको वाणी में व्यक्त नहीं कर सकते,कोई कोई काम और प्रतिक्रिया ऐसी होती है,जिसको वाणी से नहीं कहा जा सकता, केवल भाव से देखा जा सकता है,और रितुराज पवार ने वाणी और भाव से ऊपर यह कदम उठाया है, जो बच्चे बच्चियों बेटी  बहुए अपने वृद्ध माता-पिता को जिन्होंने पाल पोसकर बड़ा किया जो अपने माता-पिता को घर में अकेले छोड़ देते हैं, और निकाल देते हैं, लेकिन वृद्ध आश्रम बनने के बाद सैकड़ो माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।


 फाउंडेशन के अध्यक्ष रितुराज पवार व वरिष्ठ माधवराव पवार ने बताया ऐसे वृद्धजन जिनके आगे पीछे कोई नहीं है,उनके निवास के लिए और अच्छी सुविधा मिले किसी प्रकार की तकलीफ ना हो, मेडिकल सेवा भोजन व्यवस्था और अन्य दृष्टिकोण से देखते हुए भाव आया कि आज के युग में वृद्ध आश्रम का निर्माण किया जाए, लेकिन ऐसे कभी नहीं चाहते जीवन वृद्धाओं को उनके बच्चे कभी अलग मत करें, ऐसी स्थिति भगवान कभी ना दें,वह बहुत दुखदाई घड़ी है, जो अपने माता-पिता को बच्चे अलग कर देते हैं,आगे कहा कि आप वृद्धा सदन अच्छे भाव से स्थापना कर रहे हैं, लेकिन माता-पिता को कभी बच्चे अलग ना करें।और इस वृद्धा सदन में बहुत अच्छी सेवा देने का प्रयास करेंगे,और इसके साथ समाजजन भी हाथ में हाथ मिला कर सहयोग दे रहे हैं।


आगे कहा वृद्ध आश्रम बनाने का प्रेरणा समाज से मिली है, आज के दौर में अक्सर ऐसे वाक्य सामने आते हैं, जब घर के मुखिया बुढ़ापे में अपने आप को  बेसहारा महसूस करते हैं, उम्र के आख़िरी पढ़ाव में खुद के बच्चे दूरी बना लेते हैं,उनको भगवान के भरोसे छोड़ देते हैं, ऐसी घटनाओं में झकझोर दिया, और संकल्प लिया समाज में जो सार्थक दिया है,उसे समाज को ही लौटाएंगेऔर वृद्ध आश्रम बनाकर वापस बनाने का प्रयास करूंगा।

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