रायपुर जंगल सफारी से बुलाई गई थी ट्रेंकुलाइजर टीम
धमतरी। रविवार की सुबह-सुबह कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास कॉलोनी में भालू घुसने से हड़कंप मच गया।सूचना पर तत्काल वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। रायपुर से ट्रेंकुलाइजर की टीम को बुलाकर ट्रेंकुलाइज किया गया। ट्रीटमेंट के बाद उसे सफलतापूर्वक जंगल में छोड़ा गया। भालू को पकड़ने के बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली।जल्दी रेस्क्यू करना इसलिए भी जरूरी हो गया था क्योंकि थोड़ी ही देर बाद राज्यपाल कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले थे।
तेज गर्मी में जंगली जानवरों को पानी की तलाश होती है जंगल काटने से और वन क्षेत्र कम होने की वजह से जंगली जानवर शहर की ओर रुख करते हैं। रविवार की सुबह-सुबह कलेक्ट्रेट के आसपास रहने वाले लोगों की नींद उसे समय खुल गई जब यह जानकारी मिली कि उनके क्षेत्र में भालू घुस आया है। गौरी नगर के कई गलियों में वह भागा दौड़ी करता रहा। लगभग 6 बजे वन विभाग को इसकी सूचना मिली। वन विभाग और पुलिस की टीम कलेक्टरेट रोड में पहुंच गई। तब तक वह घूम कर एक बाड़ी में छुपा हुआ था सूचना पर डीएफओ,सीएसपी, एसडीओ भी पहुंचे। तब तक रायपुर की ट्रेंकुलाइजर टीम को सूचना दे दी गई थी
पहला ही शॉट सफल रहा
सड़क किनारे बाड़ी में भालू छुपा हुआ था। ट्रेंकुलाइजर की टीम को बाड़ी के अंदर भालू को बेहोश करना था।नगर निगम से जेसीबी बुलाई गई। जेसीबी से टीम को चढ़कर बाड़ी के ऊपर ले जाया गया। वहां से नहीं जमने पर जेसीबी को बाड़ी में घुसाया गया। जैसे ही जेसीबी घुसा वहां से भालू भाग खड़ा हुआ।तुरंत टीम नहर किनारे पहुंची और वहीं पर पहला शॉट दिया जो परफेक्ट रहा। उसके बाद वह भागने लगा। इसके बाद गौरी नगर गली नंबर 2 के पास एक मकान के पीछे वह निढाल हो गया। फिर वहां से दो शॉट और लगाए गए लेकिन तेज हवा के कारण से वह नहीं लग पाया।इसी दौरान टीम के एक सदस्य ने साहस दिखाते हुए वहां पर पहुंचकर बेहोशी का इंजेक्शन दिया। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद उसका रेस्क्यू किया गया।
पिंजरे में शुरू किया गया ट्रीटमेंट
बेहोशी की स्थिति में उसे ग्रीन मेट में ढक कर स्ट्रेचर में डालकर पिंजरे में रखा गया। इसके बाद आई डॉक्टर की टीम ने ट्रीटमेंट शुरू किया।दो बॉटल सलाइन चढ़कर उसे होश में लाया गया। क्योंकि जब बेहोशी का इंजेक्शन देते हैं तो उसे एंटीडोट देना जरूरी होता है, ताकि जंगली जानवर को किसी प्रकार की हानि ना हो सके। लगभग 1 घंटे तक ट्रीटमेंट के बाद सफलतापूर्वक उसे जंगल में छोड़ा गया। इस दौरान शिवा प्रधान भी फॉरेस्ट की टीम के साथ लगातार डटे रहे।
मादा भालू उम्र लगभग 7 वर्ष
डीएफओ श्री कृष्णा जाधव ने बताया कि सुबह 5:45 बजे भालू की सूचना मिली थी। वन विभाग की टीम तुरंत पहुंचकर मॉनिटरिंग कर रही थी। रायपुर जंगल सफारी से ट्रेंकुलाइजर की टीम को बुलाया गया। लगभग 9 बजे मिशन स्टार्ट किया गया। बेहोशी के बाद उसे पिंजरे में चिकित्सा दिया गया। यह मादा भालू था जिसकी उम्र लगभग 6 से 7 वर्ष है। वजन लगभग 100 किल रहा होगा।सफलतापूर्वक चिकित्सा के बाद उसे जंगल में छोड़ा गया। पहले भी शहर में जो भालू पकड़ा गया था। उसे भी जंगल में ही छोड़ गया था।उन्होंने बताया कि धमतरी में ट्रेंकुलाइजर टीम की आवश्यकता नहीं है इसके लिए एक्सपर्ट टीम जरूरी होती है, जो जंगल सफारी में रहते हैं। क्योंकि ट्रेंकुलाइज करने के बाद एंटीडोट देना, ट्रीटमेंट देना, मॉनिटरिंग करना थोड़ा प्रोसेस होता है और धमतरी पास होने की वजह से 1 घंटे में टीम पहुंच जाती है।





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