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Protest: कथित गो मांस तस्करी मामले में ट्विस्ट: मूल छत्तीसगढ़िया गांड़ा जाति के सदस्य आक्रोशित, आरोपी पर कड़ी कार्रवाई और जाति सत्यापन की मांग

 



भूपेंद्र साहू

धमतरी। सल्हेवार पारा में कथित गो मांस पाए जाने के संबंध में नया मोड़ आ गया है। मूल छत्तीसगढ़िया गांड़ा समाज ने इस मामले की जांच कर आरोपी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा उस बस्ती में रहने वालों की भी जाति सत्यापन की मांग करते हुए राज्यपाल के नाम कलेक्टर को आवेदन दिया है।

दिए आवेदन में कहा कि मीडिया की खबर से यह बात हमारे जाति के संबंध में सामने आई है, कि धमतरी जिले के गांड़ा बस्ती में 86 किलो गौ मांस बरामद हुआ था। तथा उक्त 86 किलो मांस के साथ आरोपी युवक संत राम बघेल को गिरफतार कर उसके विरुध्द धारा 299, 325, बी एन एस एवं छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 5 एवं 10 के तहत् अपराध पंजीबध्द की कार्यवाही की जा रही है।घटना के संबंध में छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुल छत्तीसगढ़िया गांड़ा जाति के सदस्य काफी आक्रोशित एवं व्यथित हैं। एवं  घटना को अंजाम देने वाले लोगों के विरूध्द कथन करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश के गुल छत्तीसगढ़िया गांड़ा जाति के सदस्य निम्नानुसार कार्यवाही की मांग करते हैं:-



छत्तीसगढ़ प्रदेश के मूल छत्तीसगढ़िया गांड़ा जाति के सदस्य मूलतः कृतिपूजक, कोटवारी, बुनकरी, पशुपालन का कार्य करते हैं। एवं आदिवासी जाति को आत्मसात करते हुए बढ़ा देव पूजन एवं बुद्धादेव पूजन में बाजा बजाने का कार्य करते हैं। इस प्रकार रूढी जन्य परंपरा के आधार पर अपना जीवन यापन करते हैं। धमतरी शहर के साल्हेवार पारा स्थित गांड़ा बस्ती में गौ मांस बरामदगी का समाचार जिले सहित राज्यभर में प्रसारित हुआ है। जिससे हमारे समाज की छवि धुमिल हुई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुल छत्तीसगढ़िया गांड़ा जाति के सदस्य घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति के विरूध्द कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग करते हैं।


साल्हेवार पारा में "गांड़ा बस्ती" स्थित होने की जानकारी समाचार पत्र के माध्यम से हुई है। धमतरी शहर के साल्हेवार पारा के "गांड़ा बस्ती" में गांड़ा जाति के लोग निवास करते हैं अथवा अन्य जाति के लोग निवास करते हैं। इसकी प्रशासनिक स्तर पर, स्थानीय लोगों एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुल गांड़ा गांड़ा जाति के सदस्यों एवं जिला/प्रांतिय पदाधिकारियों से पुछताछ कर सच्चाई को सामने लाते हुए एवं गांड़ा बस्ती का नाम परिवर्तन करते हुए, छत्तीसगढ़ प्रदेश के मूल गांड़ा गांड़ा जाति के सदस्य घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति के विरूध्द कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग करते हैं।अगर यदि उस बस्ती में गांड़ा जाति का कोई भी सदस्य निवास नहीं करता है तो उस बस्ती का नाम गांडा बस्ती न रखा जाये।।



समाचार पत्र के अनुसार बस्ती वासियों  संदीप नागेश, मुकेश आकाश, सरस्वती, सुनीता, स्वाति, राधा, सहित अन्य लोगो ने कहा कि उनके समुदाय में मृत पशुओं की खाल निकालने की परंपरा है। उपरोक्त के आधार पर छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुल गांड़ा गांडा जाति के सदस्यों एवं पदाधिकारीयों का दावा है, कि यह खाल निकालने की परंपरा छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुल गांड़ा जाति के किसी भी घटक में नहीं है। अतः सभी घटक (अंधकुरी, देवदास, गंधर्व, कोसरिया, झरिया, चौहान, फुलझर एवं सकतहा) के पदाधिकारियों का कहना है, कि साल्हेवार पारा स्थित गांडा बस्ती में गांड़ा जाति के लोग निवास नही करते हैं। गौ मांस तस्करी में संलिप्त लोग वास्तव में छत्तीसगढ़ मुल के गांड़ा जाति के सदस्य नहीं हैं इसलिये इनके विरूध्द गौ मांस तस्करी के साथ-साथ झूठा जाति का सहारा लेने का भी अपराध दर्ज कर कार्यवाही की जाए।


  उस बस्ती में निवास करने वाले लोग उड़ीसा प्रांत से मजदूरी की तलाश में आ कर बस गये हैं। जो गांडा जाति के नहीं हैं इनकी जाति ढोम है।  गांड़ा जाति के सदस्य के रूप में ये लोग शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं  इनकी जाति का स्थानीय एवं प्रशासनिक स्तर पर जांच करा कर सत्यापन कराने की मांग की है।

 गांड़ा जाति की संस्कृति पूर्णतः जनजातियों के समकक्ष है एवं व्यवसाय कोटवारी, पशुपालक, बुनकर एवं बुद्धादेव पूजन के अवसर पर बाजा बजाने का कार्य है। किन्तु धमतरी के साल्हेवार पारा के गांड़ा बस्ती में गौ मांस बरामदगी को गांड़ा जाति से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुल छत्तीसगढ़ीया गांड़ा जाति के मान सम्मान को काफी ठेस पहुंचा है। उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर गौ मांस तस्करी में शामिल लोगों के विरूद कही कार्यवाही करते हुए उनके जाति का सत्यापन कर गांड़ा जाति से पृथक जाति के रूप में चिन्हित करने का मांग करते हैं।

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