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गंगरेल बांध में भगवान नेमिनाथ की मूर्ति मिलने से मचा हड़कंप...करीब 37 साल पुरानी बताई जा रही है

 



 आभूषण गायब, सुरक्षित धमतरी जैन मंदिर में रखा गया


भूपेंद्र साहू

धमतरी। गंगरेल बांध के जलस्तर क्षेत्र से तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी की एक दुर्लभ एवं ऐतिहासिक संगमरमर की मूर्ति बरामद की गई है। जो लगभग 37 वर्ष प्राचीन बताई जा रही यह प्रतिमा 12 अगस्त की रात को धमतरी स्थित जैन मंदिर में पूरे आदर-सत्कार के साथ लाई गई। मूर्ति कहां से कैसे आई इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल धमतरी जैन समाज द्वारा देश भर में इसकी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से दे दी गई है। इसकी सूचना पुलिस में भी दी जाएगी।


दुर्ग दिगंबर जैन समाज के कुछ लोग बुधवार को गंगरेल घूमने आए हुए थे। इसी दौरान बोटिंग टिकट घर में उन्होंने भगवान नेमिनाथ की मूर्ति रखे देखी, पूछने पर बताया है कि यह बांध क्षेत्र में उन्हें मिला था किसी जैन समाज के व्यक्ति के आने पर संपर्क के लिए रखा गया है। दुर्ग समाज ने धमतरी जैन समाज से संपर्क किया। तत्काल धमतरी जैन समाज के विजय गोलछा सहित अन्य लोग गंगरेल पहुंचे और उसे 12 अगस्त की रात को धमतरी पार्श्वनाथ जिनालय में रखा हुआ है।मूर्ति पर संवत 2046 उत्कीर्ण है, जो इसकी प्राण प्रतिष्ठा के समय को दर्शाता है। वर्तमान में 2083 संवत चल रहा है इस हिसाब से 37 साल पुरानी मूर्ति है।


बोटिंग चालकों को दिखी मूर्ति

बोटिंग संचालक सतवंत महिलांगे ने बताया कि लगभग ढाई महीने पूर्व पानी नीचे होने पर बरगद पेड़ के पास यह मूर्ति दिखाई दी। जिसे वह अपने काउंटर में लाकर रखे हुए थे। उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह मूर्ति किसकी है या कोई भगवान की है। उन्होंने काउंटर में सिर्फ इसलिए ही रखा था ताकि कोई आकर इसकी पूछताछ करें। आखिरकार 12 अगस्त को दुर्ग से जो जैन धर्म के लोग आए थे उन्होंने देखकर इसकी जानकारी ली और धमतरी वालों को खबर की। जिसके बाद 12 अगस्त की रात को धमतरी जैन समाज के लोग इसे सुरक्षित ले गए।




आभूषण गायब, चोरी की आशंका

11 इंच ऊंची सफेद संगमरमर की इस प्रतिमा का बारीकी से निरीक्षण करने पर पाया गया कि मूर्ति पर लगे बहुमूल्य आभूषण गायब हैं। इस पर धमतरी जैन समाज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिमा बांध के पानी तक कैसे पहुंची, यह गंभीर जांच का विषय है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि किसी असामाजिक तत्व या चोरों द्वारा किसी मंदिर से मूर्ति चुराकर उसके सोने-चांदी के गहने उतार लिए गए होंगे और पकड़े जाने के डर से प्रतिमा को बांध के पानी में फेंक दिया गया होगा।



देशभर के जैन समाज को दी गई सूचना

धमतरी श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष विजय गोलछा ने बताया कि प्रतिमा मिलने और उस पर उत्कीर्ण संवत 2046 के आधार पर देशभर के जैन संघों एवं समाजों को इसकी सूचना भेज दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह प्रतिमा मूल रूप से किस स्थान या मंदिर की है। मूर्ति में शंकर नगर रायपुर भी लिखा हुआ है इसके अलावा जिन उदय सागर जी महाराज और उनके शिष्य महोदय सागर जी महाराज का भी नाम लिखा है दोनों अब इस दुनिया में नहीं है उनके शिष्यों से पता की जा रही है।​फिलहाल, प्रतिमा के सुरक्षित जैन मंदिर में विराजमान होने से श्रद्धालुओं में भक्ति का माहौल है, वहीं पुलिस व समाज स्तर पर इसके मूल स्थान और गायब आभूषणों के संबंध में तफ्तीश की जा रही है। इसकी सूचना पुलिस को भी दी जाएगी।

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