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कबाड़ से जुगाड़: Gen Z किसान ने तैयार किया स्वदेशी ट्रैक्टर कम्बाइंड फर्टिलाइजर स्प्रेडर

 


पांच मिनट में लगभग एक एकड़ खेत में खाद और कीटनाशक का छिड़काव एक साथ कर देता है 


भूपेंद्र साहू

धमतरी। एक तरफ आज की खेती में आधुनिक यंत्र आ गए हैं वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी zen G हैं जो कबाड़ से जुगाड़ कर आधुनिक उपकरण तैयार कर रहे हैं जो खेती में जो मददगार साबित हो रहा है 28 वर्षीय युवा किसान ने अपनी सूझबूझ और जुगाड़ तकनीक से ऐसा कृषि यंत्र तैयार किया है, जो बड़े किसानों के साथ छोटे किसानों के लिए भी उम्मीद की नई किरण बन सकता है।किसान ने मोबाइल पर कृषि मशीनों की कार्यप्रणाली देखकर कबाड़ और लोहे के सामान से ट्रैक्टर कंबाइंड फर्टिलाइजर स्प्रेडर तैयार किया है।जो खेत में रासायनिक खाद और कीटनाशक दवा का एक साथ छिड़काव करती है। 


बालोद जिले के अंतिम छोर में बसे ग्राम अरकार के युवा किसान टिकेन्द्र साहू ने अपने पिताजी के सहयोग से कम लागत में यह स्प्रेडर मशीन तैयार किया है।इससे अलग-अलग कार्य करने की जरूरत नहीं पड़ती और किसानों का समय, श्रम तथा डीजल की बचत होती है। मशीन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कार्यक्षमता है। ट्रैक्टर से संचालित होने वाला यह यंत्र मात्र पांच मिनट में लगभग एक एकड़ खेत में समान रूप से खाद और कीटनाशक का छिड़काव एक साथ कर देता है। इससे खेती का कार्य तेज, आसान और अधिक प्रभावी हो जाता है। उन्होंने बताया कि मशीन के संचालन में डीजल की खपत भी कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है और किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है।


बाजार में कीमत 10 लाख, खुद बनाई 1.70 लाख में

टिकेंद्र साहू ने बताया कि बाजार में इसी प्रकार की मशीन इंजन सहित 9 से 10 लाख रुपए तक में उपलब्ध है, जिसे खरीदना अधिकांश किसानों के लिए आसान नहीं है। इसी कारण उन्होंने खुद मशीन बनाने का निर्णय लिया। इस यंत्र का उपयोग हरियाण और पंजाब के किसान करते हैं। लेकिन जिले में किसी के पास नहीं है। उन्होंने कबाड़ और लोहे के उपलब्ध सामान का उपयोग करते हुए करीब 1.70 लाख रुपए की लागत में यह कृषि यंत्र तैयार किया। कम लागत में तैयार इस मशीन की कार्यक्षमता देखकर आसपास के किसान भी इसे देखने पहुंच रहे हैं।




पिता से मिली खेती की सीख, बेटे ने जोड़ी तकनीक

टिकेंद्र साहू किसान परिवार से हैं और बचपन से खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। खेती के दौरान आने वाली समस्याओं को देखते हुए उन्होंने कम लागत में ऐसा यंत्र बनाने का निर्णय लिया, जो किसानों के लिए व्यवहारिक और उपयोगी हो। मोबाइल के माध्यम से तकनीकी जानकारी जुटाकर उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर मशीन तैयार की। इस काम में उनके पिता तुलसीराम साहू ने भी पूरा साथ दिया। अब उनका लक्ष्य इस मशीन को और अधिक उन्नत बनाने के साथ अन्य ट्रैक्टर चलित कृषि यंत्र बनाना  है, ताकि अधिक से अधिक किसान कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें।

यंत्र की जानकारी मिलने पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर इसका निरीक्षण किया। उन्होंने मशीन की कार्यप्रणाली देखी और इसे किसानों के लिए उपयोगी नवाचार बताया।











 

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