22 वर्षों से लावारिस और अज्ञात शवों को ससम्मान सद्गति देने में जुटी समिति
भूपेंद्र साहू
धमतरी। अपनों का तर्पण और पिंडदान तो हर कोई करता है, लेकिन जिनके इस संसार में कोई आगे-पीछे नहीं हैं, उनकी आत्मा की शांति का बीड़ा उठाकर धमतरी की ‘स्वर्गधाम सेवा समिति’ एक मिसाल पेश कर रही है। वर्ष 2004 से लावारिस और अज्ञात शवों को ससम्मान सद्गति देने में जुटी यह समिति इस वर्ष सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के पावन अवसर पर 715 अनजान मृतकों का विधिवत सामूहिक पिंडदान व तर्पण किया गया।
यह धार्मिक आयोजन 10 अक्टूबर को चित्रोत्पला गंगा के तट पर स्थित रुद्रेश्वर धाम (रुद्री) में प्रातः 10 बजे से आयोजित हुआ। पंडित रामअवतार तिवारी ने हिन्दू रीति-रिवाज के तहत पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद पिंडदान कर नदी में तर्पण कराया गया।
तर्पण का वास्तविक अर्थ पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है: अशोक पवार
समिति के अध्यक्ष एवंत गोलछा और महासचिव अशोक पवार ने पितृ पक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन 16 दिनों को केवल शोक या कर्मकांड नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के एक त्यौहार के रूप में मनाना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष संस्था द्वारा 715 अनजान लाशों का तर्पण व पिंडदान कर मानवता की मिसाल पेश की गई है। हिन्दू धर्म में पितरों की तृप्ति के लिए जल और भोजन का विशेष विधान है, जिसे सात अलग-अलग प्रकार के तर्पण और हवन के माध्यम से पूरा किया जाता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस विशेष अवधि में गाय, श्वान (कुत्ता) और काग (कौवा) जैसे जीवों की सेवा करने वाले समाजसेवियों को सम्मानित करना सराहनीय कदम है। तर्पण का वास्तविक अर्थ पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। इससे न केवल मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, बल्कि समाज में सभी प्राणियों के प्रति समरसता और सद्भावना का भाव भी जागृत होता है।




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