भूपेंद्र साहू
धमतरी।ओडिशा से आई 10 से 12 वर्ष की बीमार हथिनी ने सात दिनों तक चले उपचार के बाद 17 जनवरी की सुबह अंतिम सांस ली। 22 दिसंबर को उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों को जानकारी मिली थी कि एक हथिनी गंभीर रूप से बीमार है और कई दिनों से कुछ खा नहीं पा रही है, क्योंकि उसका मल त्याग नहीं हो रहा था।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हथिनी को गरियाबंद और धमतरी होते हुए यूएसटीआर लाया गया, जहां पिछले सात दिनों से उसका लगातार इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान हथिनी की हालत में कुछ सुधार भी हुआ था। वह बीच-बीच में मल त्याग करने लगी थी और थोड़ा-थोड़ा भोजन भी करने लगी थी, जिससे वन विभाग और चिकित्सकों को उसके स्वस्थ होने की उम्मीद जगी थी।हालांकि 15 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। स्थिति को संभालने के लिए जंगल सफारी और कानन पेंडारी जू के विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी सहायता ली गई। सभी प्रयासों के बावजूद शनिवार सुबह हथिनी की मौत हो गई।
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि हथिनी की बीमारी गंभीर और जटिल थी। उसका इलाज पूरी सतर्कता और विशेषज्ञों की निगरानी में किया जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश उसे बचाया नहीं जा सका। हथिनी को सही समय पर ट्रैक कर इलाज शुरू करने से जनहानि की घटना रोक ली गई थी।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में इसी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त एक नर हाथी को समय रहते उपचार देकर बचा लिया गया था। उस अनुभव के आधार पर इस बार भी पूरी कोशिश की गई, लेकिन हथिनी की स्थिति अत्यंत नाजुक होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। हथिनी के पोस्टमार्टम के बाद उसकी मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी।



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