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DMT: वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य का मरणोपरांत नेत्र व देहदान

 






धमतरी। धमतरी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य (74 वर्ष) का शनिवार को  रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। रंजीत भट्टाचार्य के निधन की खबर से साहित्य एवं पत्रकार जगत में शोक की लहर छा गई।

रंजीत भट्टाचार्य मूलतः धमतरी के निवासी रहे हैं। उन्होंने 1978 में पत्रकारिता की शुरूआत अपने मित्र रामबिलास अग्रवाल के साथ साप्ताहिक अखबार अपना मोर्चा के सम्पादक के रूप में की।रंजीत भट्टाचार्य अपना मोर्चा में 11 साल तक सम्पादक रहने के बाद दैनिक अखबार अमृत संदेश से जुड़ गये। वे 1989 से 1997 तक इसी दैनिक अखबार में कार्यरत रहे। 1999 में चार माह तक के लिए दैनिक भास्कर में ब्यूरो चीफ रहे। वे वर्षों तक प्रखर समाचार में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2000 से समाचार पत्र हरिभूमि से जुड़ गये। 21 साल तक इसी अखबार में पत्रकारिता की। रिटायरमेंट के बाद रंजीत भट्टाचार्य ने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में उनका लेखन जारी रहा। गजलें और काहानियां भी लिखते रहे।

उनकी दो उपन्यास पाव बनिहार, अबूझमाड़ का अतिथि के अलावा अनेक कविता संग्रह और रचनाएं प्रकाशित हुई। रंजीत भट्टाचार्य के परिवार में दो भाई संदीप और सुजीत व तीन बहने हैं। 


 नेत्र व देहदान किया गया

रंजीत भट्टाचार्य ने अपने जीवन काल में मृत्यु के बाद नेत्रदान और देहदान की घोषणा की थी। उनकी इच्छानुसार सबसे पहले हाऊसिंग बोर्ड कालोनी रामबिलास अग्रवाल के निवास से सुबह मेडिकल टीम के नेत्र सहायक अधिकारी गुरूशरण साहू, तोमेश भंडारी, ओमप्रकाश पटेल, लोकेश यदु ने नेत्रदान की औपचारिकता पूरी की। इसके बाद दोपहर को निवास स्थान से अंतिम यात्रा निकाली गई। थोड़ी दूर बाद मेडिकल टीम एम्बुलेंस से उनके मृतकाया को मेडिकल कालेज रायपुर ले गई। इस तरह देहदान की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई।




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