धमतरी।उदंती सीता नदी वन अभयारण्य क्षेत्र में इन दिनों बाघ की लगातार गतिविधि सामने आ रही है। वन विभाग द्वारा लगाए गए यूएसटीआर (कैमरा ट्रैप) में बार-बार बाघ की तस्वीरें कैद हो रही हैं। हाल ही में अलग-अलग स्थानों पर लगे कैमरों में बाघ की स्पष्ट तस्वीरें मिलने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह देखा जा रहा है।
अभयारण्य क्षेत्र घने जंगल, जलस्रोत और वन्यजीवों की विविधता के लिए जाना जाता है। यहां हिरण, जंगली सूअर, नीलगाय और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी बाघ के लिए प्राकृतिक शिकार का आधार तैयार करती है। यही कारण है कि जंगल का वातावरण बाघ के अनुकूल माना जाता है। कैमरा ट्रैप में लगातार तस्वीरें मिलने से यह संकेत मिल रहा है कि बाघ इस क्षेत्र में नियमित रूप से आवाजाही कर रहा है।
उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि वन्यजीवों की निगरानी के लिए अभयारण्य के विभिन्न हिस्सों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। हाल के दिनों में इन कैमरों में कई बार बाघ की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे स्पष्ट होता है कि जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है और वन्यजीवों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
उप निदेशक ने यह भी बताया कि बाघ की गतिविधि सामने आने के बाद वन विभाग ने आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। ग्रामीणों को जंगल के अंदर अनावश्यक रूप से न जाने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वन अमला नियमित गश्त कर रहा है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार टाइगर सेंसस कई मायनों में खास रहा है। क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के बाद पहली बार पूरे टाइगर रिजर्व के सभी 143 बीट्स में सर्वेक्षण कराया गया है। इससे पहले सुरक्षा कारणों की वजह से वन विभाग केवल 60 से 70 प्रतिशत क्षेत्र में ही सर्वे कर पाता था।कैमरा ट्रैप और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से किए जा रहे इस सर्वे में लगातार मिल रही तस्वीरें यह संकेत दे रही हैं कि जंगल में बाघों की आवाजाही बनी हुई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जंगल में बाघ की मौजूदगी उस क्षेत्र के स्वस्थ पर्यावरण का संकेत होती है। सीता नदी वन अभयारण्य में बाघ की लगातार तस्वीरें सामने आना इस बात का प्रमाण है कि यहां का प्राकृतिक संतुलन बेहतर बना हुआ है। इससे आने वाले समय में इस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।




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