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महानदी उद्गम क्षेत्र में 20 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य प्रस्तावित,नगरी-सिहावा बनेगा धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र

 


महानदी संरक्षण अभियान से सजेगा नगरी-सिहावा क्षेत्र



धमतरी। नगरी विकासखंड के ग्राम फारसिया स्थित महामाया मंदिर परिसर में संचालित सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों का आज कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य गुणवत्ता एवं समय-सीमा के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गजेन्द्र ठाकुर, एसडीएम प्रीति दुर्गम सहित संबंधित  अधिकारी, गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि उपस्थित थे । 


अधिकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर में सोलर लाइट स्थापना का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही तेवर ब्लॉक निर्माण, नारियल पौधरोपण, पार्क निर्माण, बैठने हेतु चेयर स्थापना सहित विभिन्न सौंदर्यीकरण कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में मंदिर परिसर स्थित पवित्र कुंड की साफ-सफाई भी कराई गई है। कलेक्टर श्री मिश्रा ने कुंड की आवश्यक मरम्मत एवं संरक्षण कार्य शीघ्र कराने के निर्देश दिए ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें तथा स्थल की धार्मिक गरिमा और आकर्षण बना रहे।



कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि गणेश घाट संगम स्थल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। स्थानीय किसानों एवं नागरिकों के साथ बैठक कर अतिरिक्त सौंदर्यीकरण, आधारभूत संरचना विकास तथा पर्यटक सुविधाओं के विस्तार की रूपरेखा बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध नगरी-सिहावा क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


उन्होंने जानकारी दी कि गणेश घाट संगम स्थल, कणेश्वर मंदिर एवं सप्तऋषि क्षेत्र में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


   कलेक्टर श्री मिश्रा ने स्थानीय नागरिकों से महानदी संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संवर्धन के कार्यों में सक्रिय सहभागिता की अपील करते हुए कहा कि जनसहभागिता से ही नगरी-सिहावा क्षेत्र को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य विकास कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित करना है।

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