धमतरी। "छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आईजी पी. सुंदरराज के कार्यशैली, समर्पण और विजन से अत्यंत प्रभावित हैं। वे अक्सर कहते हैं कि ऐसे कर्मठ और ईमानदार अधिकारी ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की असली नींव रखते हैं। मुख्यमंत्री ने भी उनके जज्बे और मानवता-भरे नेतृत्व को नमन करते हुए कहा है कि बस्तर को शांति की राह पर लाने में सुंदरराज जी का योगदान अतुलनीय है।"
सरकार भी इनके काम को खुलकर सराहती है। यही कारण है कि बस्तर रेंज की कमान साढ़े 3 साल से ज्यादा समय से उन्हीं के पास है। नक्सल प्रभावित इलाकों में शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या नक्सलियों के खिलाफ अंतिम लड़ाई, सुंदरराज जी हमेशा मोर्चे पर खड़े मिलते हैं।
कौन हैं आईजी पी. सुंदरराज?
- *जन्म और परिवार*: पी. सुंदरराज का जन्म 27 फरवरी 1980 को तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता और पूरा परिवार आज भी खेती-किसानी से जुड़े हैं।
- *शिक्षा*: कोयंबटूर एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से BSc Agriculture किया। कॉलेज के सीनियर्स ने प्रेरित किया तो पहले ही प्रयास में 2003 में UPSC पास कर IPS बन गए।
- *भाषा की चुनौती*: पढ़ाई के दौरान हिंदी नहीं पढ़ी थी। ट्रेनिंग के दौरान हिंदी सीखी और आज बस्तर के ग्रामीणों से सहजता से बात करते हैं।
बस्तर से 22 साल का नाता
इनका लगभग पूरा करियर नक्सल प्रभावित इलाकों में बीता है।
- 25 साल की उम्र में पहली पोस्टिंग बस्तर में हुई।
- सरगुजा, कबीरधाम, राजनांदगांव, कोरबा, कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, नारायणपुर में SP रहे।
- 20 नवंबर 2021 से बस्तर रेंज के IG हैं।
इनकी रणनीति और फील्ड में मौजूदगी ने बस्तर का नक्शा बदल दिया है। हिडमा जैसे 1 करोड़ के इनामी नक्सली का एनकाउंटर इन्हीं के नेतृत्व में हुआ। नक्सली इनके नाम से खौफ खाते हैं, लेकिन आम जनता के लिए ये 'सौम्य और कर्मठ' अधिकारी हैं।
सादगी और इंसानियत
सुंदरराज जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी सादगी है। किसान परिवार से होने के कारण आज भी इन्हें खेती करना पसंद है। नक्सल ऑपरेशन के बीच भी ये आम ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्या सुनते हैं। इन्होंने साबित किया कि बंदूक से नहीं, भरोसे से जंग जीती जाती है।
कल जब मैं उनसे मिला तो जो बात सबसे ज्यादा छुई, वो थी उनका हर आम आदमी से मिलने का अंदाज। कोई घमंड नहीं, कोई दूरी नहीं—बस एक सच्चा सिपाही जो बस्तर को बदलने के मिशन पर निकला है।
सीख
सच्चा नेतृत्व वही है जो अधिकार के साथ-साथ मानवता को भी साथ लेकर चले। शक्ति का असली उपयोग दूसरों को दबाने में नहीं, उन्हें ऊपर उठाने में है।
*राज्य सरकार और बस्तर की जनता को ऐसे ईमानदार, कर्मठ और सौम्य अधिकारी पर गर्व है।*
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_"बस्तर के आईजी पी. सुंदरराज किसान परिवार से निकलकर बस्तर के नायक बने। 22 साल से नक्सल बेल्ट में सेवा दे रहे हैं। इनकी सादगी, मेहनत और इंसानियत बस्तर को शांति की ओर ले जा रही है। ऐसे अधिकारी पर गर्व है।"_
खूबलाल ध्रुव
जनसेवक

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