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सड़क चौड़ीकरण के दौरान हो रही वृक्षों की कटाई मामले में यूथ हॉस्टल ने DFO को दिया ज्ञापन

 


धमतरी।सड़क चौड़ीकरण के दौरान शहर में हो रही वृक्षों की कटाई को रोकने यूथ हॉस्टल ने DFO सहित कलेक्टर,महापौर को ज्ञापन दिया है। जिसमें वर्तमान में पेड़ों की कटाई को रोकने,इसका विकल्प तलाशने का अनुरोध किया गया है।


यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (धमतरी इकाई) के सदस्यों ने दिये इस ज्ञापन में कहा वर्तमान में रत्नाबांधा रोड, सिहावा रोड, कोलियारी रोड मार्गों पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हरे-भरे, दशकों पुराने वृक्षों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। इस कदम से  सभी पर्यावरण प्रेमी और धमतरी के नागरिक अत्यंत मर्माहत और चिंतित हैं।



इस संबंध में कुछ बिंदुओं पर त्वरित ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं-

भीषण गर्मी और असंवेदनशीलता: वर्तमान में पूरा क्षेत्र भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। ऐसे समय में जब नागरिकों को छांव और शीतलता की सबसे ज्यादा जरूरत है, ठीक विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के पहले इस तरह पेड़ों को काटना उचित नही है।



पर्यावरण का अपूरणीय नुकसान: काटे जा रहे वृक्ष केवल लकड़ी नहीं हैं, बल्कि वे धमतरी के पर्यावरण के फेफड़े हैं, जो तापमान को नियंत्रित रखते हैं। इनके नष्ट होने से शहर का जलस्तर और गिरेगा तथा गर्मी और भयानक रूप ले लेगी।

वैकल्पिक रास्तों की अनदेखी: मानना है कि विकास और पर्यावरण में संतुलन होना अनिवार्य है। बिना किसी ठोस 'ट्री ट्रांसप्लांटेशन' (वृक्षों को सुरक्षित दूसरी जगह लगाने) की योजना के, सीधे कुल्हाड़ी चला देना न्यायसंगत नहीं है।​आप धमतरी जिले में वन एवं पर्यावरण के सर्वोच्च संरक्षक हैं। इसलिए धमतरी की जनता और हमारी संस्था आपसे बहुत बड़ी और स्वाभाविक आशाएं रखती है।


​यूथ हॉस्टल के पदाधिकारी हुकुमचंद जैन, योगेश गुप्ता,मनीष चंद्राकर, सुबोध महावर ने डीएफओ सहित कलेक्टर,महापौर को आवेदन देते अपील की है कि​इन सभी मार्गों पर चल रही वृक्षों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।​सड़क निर्माण एजेंसियों को पाबंद किया जाए कि वे कम से कम पेड़ों को नुकसान पहुँचाने वाला डिजाइन तैयार करें।

​जो पेड़ बहुत अनिवार्य रूप से हटाए जाने हैं, उन्हें काटने के बजाय आधुनिक तकनीकों से लोकेट/ट्रांसप्लांट (दूसरी जगह जीवित रोपित) किया जाए।​काटे गए प्रत्येक वृक्ष के बदले नियमानुसार 10 नए पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की समयबद्ध योजना सार्वजनिक की जाए।​यदि इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र ही सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हमारी संस्था नागरिकों के साथ मिलकर पर्यावरण की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए बाध्य होगी।


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