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DMT: श्री आदिश्वर जिनालय से पार्श्वनाथ जिनालय तक निकली साध्वी भगवंतों की भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश यात्रा

 



धमतरी।परम पूज्य प्रवर्तनी कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधी श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 4 का धर्मनगरी धमतरी की धन्य धरा में मंगल प्रवेश हुआ। 

28 जुलाई सोमवार से चातुर्मास का प्रारंभ हो रहा है।  प्रवेश के अवसर पर जगह जगह समाजजनों एवं नगरजनों की ओर से साध्वी भगवंतों का स्वागत किया गया। समाज की महिलाओं द्वारा मंगल कलश से बधाया गया साथ ही पूरे शोभायात्रा के समय मंगल कलश साथ लेकर चले। सभी के हाथ में जैन धर्म का ध्वज था एवं जिनशासन की जय जयकार के नारे से वातावरण गुंजायमान हो गया था। श्री पार्श्वनाथ जिनालय पहुंचकर गुरु भगवंतों द्वारा परमात्मा एवं दादा गुरुदेव का दर्शन वंदन किया गया । उसके बाद चातुर्मासिक प्रवेश का कार्यक्रम धर्मसभा के रूप में प्रवचन हाल में प्रारंभ हुआ। समाज की महिला मंडलों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।


परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहब ने अपने प्रवचन के माध्यम से बताया कि चातुर्मासिक प्रवेश का ये अवसर हमें भावुक करने वाला भी है और प्रेरणा देने वाला भी है। मुम्बई से विहार करने के साथ ही अनेक स्थानों से चातुर्मास की विनती प्राप्त होने लगी। किंतु गुरूवर्या श्री के चातुर्मास का सौभाग्य अमरावती संघ को प्राप्त हुआ। साथ ही उनकी प्रेरणा एवं आशीर्वाद के साथ हमे धमतरी चातुर्मास हेतु आना पड़ा।

आज का ये प्रवेश केवल नगर प्रवेश तक ही सीमित न रहे बल्कि ये शरीर से आत्मा में प्रवेश का अवसर बने, आत्म जागृति का अवसर बने। आत्मा को जगाने का ये अवसर जो प्राप्त हुआ है हमे उसका अधिक से अधिक लाभ उठाने का पुरुषार्थ करना है। जैन धर्म के अनुसार तीन चातुर्मास होते है, जिसमें इस चातुर्मास को आषाढ़ी चातुर्मास कहा जाता है। ये चातुर्मास आषाढ़ सुदी चौदस से प्रारंभ होता है और इसका कार्तिक सुदी पूनम को समापन होता है। इस चार माह के अवसर में विशेष रूप से धर्म आराधना साधना करना चाहिए। इस चार माह में साधु साध्वी भी एक स्थान में रहकर आराधना साधना के माध्यम से आत्मजागृति हेतु पुरुषार्थ करते है। मुझ पर गुरुवर्या श्री की कृपा के साथ ही धमतरी संघ का भी उपकार है ।2010 में जब धमतरी से संघवी लूणकरण जी गोलछा एवं संघवी लक्ष्मीलाल जी लूनिया परिवार द्वारा धमतरी से कैवल्यधाम छहरीपाली पद यात्रा निकाली गई थी। उस समय परम पूज्य गुरुवर्या श्री स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब का सानिध्य मुझे भी प्राप्त हुआ। और उस समय गुरूवर्या श्री से मिलते ही नाम के अनुरूप जो स्नेह की वर्षा  गुरूवर्या श्री से प्राप्त हुई। मैंने उसी समय निर्णय कर लिया कि मुझे संसार के भ्रमण में नहीं फंसना है बल्कि संयम जीवन ग्रहण करके पूज्य श्री की पावन निश्रा जीवन पर्यंत प्राप्त करना है और आत्मा का विकास करना है। इस प्रकार धमतरी संघ के पदयात्रा के दौरान गुरुवर्या श्री के समीप आने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ। इस हेतु मैं धमतरी संघ का भी धन्यवाद करती हूँ।




चातुर्मास काल पानी और वाणी का समय होता है। इस काल में इंद्र देवता पानी बरसाने का और साधु साध्वी जिनवाणी बरसाने का कार्य करते है। जमीन में गिरकर पानी धरती को धन धान्य से भरपूर बनाती है और जिनवाणी आत्मा को जगाती है। पानी के गिरने से धरती की गर्मी शांत होती है। और जिनवाणी के श्रवण से आत्मा में लगे कर्मों की गर्मी को शांत किया जा सकता है। पानी शरीर को साफ करती है जिनवाणी आत्मा को साफ करती है। चातुर्मास काल में साधु साध्वी के माध्यम से जिनवाणी को श्रवण करते हुए जो अपने भीतर जाता है वो संसार से तर जाता है। इस 120 दिन के चातुर्मास काल के समय में हमे एक को अर्थात आत्मा को जानने का प्रयास करना है। क्योंकि ज्ञानीजनों का कहना है कि जो आत्मा को जान जाता है वो सबकुछ जान जाता है। अब हमे देव गुरु धर्म की शरण को स्वीकार करते हुए आत्मा को जानने का प्रयास करना है। जीवन में परिवर्तन लाने के लिए इस चातुर्मास का लाभ उठाना है। इस चातुर्मास काल के दौरान जिनवाणी के श्रवण का अवसर गुरु भगवंतों के मुखारविन्द से श्रीसंघ एवं नगरवासियों को मिलेगा। 

प्रवेश के समय गुरु भगवंतों के सांसारिक माता पिता एवं अन्य पारिवारिक जन भी उपस्थित रहे। श्रीसंघ एवं चातुर्मास व्यवस्था समिति की ओर से सभी का सम्मान किया गया।



इस प्रवेश के अवसर पर विजय गोलछा, जीवन लोढ़ा, धरमचंद पारख, विरेंद्र गोलछा, अजय बरडिया, पारसमल गोलछा, लूणकरण गोलछा, लक्ष्मीलाल लूनिया, मूलचंद लुनिया, सुरेश बच्छावत, हीरा बच्छावत, निलेश पारख, अमित लोढ़ा, मनोज कटारिया, श्याम डागा, कुशल पारख, राहुल सेठिया, पूनम गोलछा, कुशल चोपड़ा, संकेत बरडिया, नीरज नाहर, आकाश गोलछा, ललित पारख, मोतीलाल चोपड़ा, मोतीलाल बोहरा, नरेंद्र बरडिया, विमल पारख,  ज्योति लूनिया, किरण सेठिया, किरण गोलछा, ममता पारख, विजयलक्ष्मी बैद, पुष्पा गोलछा, रोशन बरडिया, अलित बुरड़, संगीता गोलछा, मुमुक्षु बहन योगिता बरडिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। साथ ही राजनांदगांव, दुर्ग, नयापारा राजिम, दल्लीराजहरा, नगरी, बालोद, डौंडी लोहरा, भिवंडी सहित अन्य शहरों से भी समाजजन उपस्थित रहे।




 

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