धमतरी। पिता के अरमान, ख्वाब उसमें ध्वस्त होते नजर आया जब उसने अपने ही बेटी को पंखे के फंदे में झूलते हुए देखा। परिवार बेटी की इस आत्मघाती कदम से स्तब्ध हो गए हैं।कक्षा 11वीं की छात्रा ने पेपर बिगड़ने पर आत्महत्या जैसे कदम उठा लिया।
अस्पताल पुलिस चौकी से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम भेलवाकूदा थाना भखारा में कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। भरत लाल साहू ने पुलिस को बयान दिया कि वैष्णवी साहू 17 वर्ष पचपेड़ी स्कूल में कक्षा 11वीं में पढ़ती थी। 9 अप्रैल को पेपर देकर आने पर बताया कि दो पेपर बिगड़ गया है। उसे समझाया गया कि 11वीं बोर्ड नहीं है पूरक आने पर फिर से पेपर दिला देना। उसी दिन से वह गुमसुम रहने लगी,बातचीत भी कम करती थी। 14 अप्रैल को गांव में साहू समाज के कार्यक्रम में सभी लोग गए थे। दोपहर 3:30 बजे लौटे तो वैष्णवी को खाना खाने के लिए बुलाया। कोई रिस्पांस नहीं मिलने पर कमरे में जाकर देखा तो पंखे में दुपट्टा का फंदा बनाकर लटकी हुई थी। उतार कर जिला अस्पताल लाए जहां पर डॉक्टर ने 5:15 बजे मृत घोषित कर दिया।
🔍 मनोवैज्ञानिकों का ओपिनियन
1. अत्यधिक दबाव और अपेक्षाएं
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार आज के समय में छात्रों पर माता-पिता, समाज और खुद की अपेक्षाओं का बहुत दबाव होता है। जब परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आता, तो वे खुद को असफल मान लेते हैं।
2. आत्मसम्मान में गिरावट
फेल होने या पेपर खराब होने पर कई छात्र अपनी काबिलियत पर शक करने लगते हैं। उनका आत्मविश्वास टूट जाता है और वे खुद को बेकार समझने लगते हैं।
3. तुलना की मानसिकता
दूसरों से तुलना (दोस्त, रिश्तेदार, टॉपर) छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ाती है। उन्हें लगता है कि वे पीछे रह गए हैं, जिससे निराशा गहरी हो जाती है।
4. भावनात्मक सपोर्ट की कमी
कई बार छात्र अपनी परेशानी किसी से शेयर नहीं कर पाते। घर या स्कूल में खुलकर बात करने का माहौल नहीं होने से वे अकेलापन महसूस करते हैं।
5. असफलता को अंत समझ लेना
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि कुछ छात्र असफलता को जीवन का अंत मान लेते हैं, जबकि यह सिर्फ एक पड़ाव होता है।
🧠 मनोवैज्ञानिक क्या सलाह देते हैं
✔ असफलता को सीख के रूप में लें
हर असफलता हमें कुछ सिखाती है। इसे अंत नहीं बल्कि सुधार का मौका समझना चाहिए।
✔ खुलकर बात करें
अपनी समस्या दोस्तों, परिवार या टीचर से साझा करें। बात करने से मानसिक दबाव कम होता है।
✔ रिजल्ट से ज्यादा जरूरी मानसिक स्वास्थ्य
अच्छे नंबर से ज्यादा जरूरी है कि छात्र मानसिक रूप से स्वस्थ रहें।
✔ माता-पिता की भूमिका
माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें सपोर्ट करें।




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