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नगरी डिपो में हुआ छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय काष्ठागार प्रबंधन कार्यशाला,PCCF ने दिया मार्गदर्शन

 


धमतरी।वनमंडल धमतरी के अंतर्गत काष्ठागार नगरी में शनिवार को छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय काष्ठागार प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पूरे राज्य स्तर के वन मंडलाधिकारी, प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा के अधिकारी, प्रशिक्षु राज्य वन सेवा के सहायक वन संरक्षक, उपवनमंडलाधिकारी, वन काष्ठागार अधिकारी उपस्थित हुए। इस कार्यशाला का आयोजन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव के निर्देशन व मार्गदर्शन मे आयोजित किया गया।

 वन बल प्रमुख श्री राव ने धमतरी वनमंडल की ऐतेहासिक जानकारी देते हुए बताया कि ब्रिटिश समय में धमतरी उत्पादन डिवीजन से यहाँ की काष्ठ विदेशों तक साल की ईमारती काष्ठों से रेलवे के स्लीपर बनाने हेतु जाती थी तथा डिपो को ईमारती काष्ठों का शोरूम बताया जितनी ज्यादा बेहतर काष्ठ डिपों में होगी उतनी ज्यादा मात्रा में ही शासन को राजस्व की प्राप्ति होगी। काष्ठागार प्रबंधन के तहत महत्वपूर्ण कार्यों जैसे ग्रेडिंग, कार्टिंग चालानों में पुर्नमापन, कूपो का समाधान पत्रक तैयार करना, रिकॉर्ड कीपिंग, डिपो को विभिन्न सेक्टरो में विभाजित करना, थप्पीकरण, जलाउ चट्टों का थप्पीकरण, व्यापारियों एवं बाजार की मांग अनुसार शुद्ध लॉट तैयार करना, लॉट नियंत्रण पंजी, मेजरमेंट में गलती नहीं करना आदि बातों को विस्तारित रूप में कार्यशाला में उपस्थित वनाधिकारियों को अवगत कराया। 

इस कार्यशाला में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्पादन एस. जगदीशन ने इस कार्यशाला का उददेश्य बताया कि कूपों से निकलने वाली बेहतर काष्ठ को नीलाम के माध्यम से विक्रय करने पर जो अधिकतम मूल्य प्राप्त होता है जो राजस्व के रूप में शासन के खजाने में दाखिल होता है, इस राजस्व आय से ही विभाग को बजट मिलता है जो जंगलों के उपचार, सुरक्षा, विकास कार्य के साथ जनहित कार्य में उपयोग होता है.... रायपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मणिवासगन एस. ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से काष्ठागार में कार्य करने वाले अधिकारी / कर्मचारी के फील्ड कौशल को बढ़ाना है ताकि वे कूपों से प्राप्त काष्ठ को उच्च क्वालिटी के ईमारती बनाना ताकि नीलाम में विक्रयदारों द्वारा उच्च बोली लगाकर शासन को ज्यादा से ज्यादा राजस्व प्राप्त हो जिससे कि विकासोन्मुखी योजनाएं बनाई जा सके।

 कार्यशाला में धमतरी वनमंडलाधिकारी जाधव श्रीकृष्ण ने प्रधान मुख्य वन सरक्षक एव वन बल प्रमुख, अपर प्रधान मुख्य वन सरक्षक, उत्पादन, मुख्य वन संरक्षक, सभी वनमंडलों के डीएफओ, उपवनमंडलाधिकारी, काष्ठागार अधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारियों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि यह  राज्य स्तरीय कार्यशाला प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। इस कार्यशाला के माध्यम से काष्ठागार प्रबंधन को सुधारात्मक करते हुए तकनीकी पूर्ण व सैद्धांतिक तरीके से लागू करना ताकि कर्मचारी/अधिकारी को डिपो कार्य में आने वाली समस्या से निपटा जा सकें, जिसमें मुख्यतः डिपो स्तर पर नीलामी प्रक्रिया अंतर्गत वन उपज / लकड़ी के लॉटस का समयबद्ध गठन, उनका विधिवत सधारण, अभिलेखो का रख-रखाव तथा नीलामी से पूर्व की आवश्यक कार्यवाहियों के सबंध में सभी डिपो अधिकारियों को एकरूप दिशा निर्देश प्रदान किया जाना चाहिए ताकि नीलामी कार्य समय पर पारदर्शी रूप से सम्पन्न हो सके। कार्यशाला में काष्ठागार प्रबंधन के लिए एस.एस. नाविक, संयुक्त वनमंडलाधिकारी बिरगुड़ी ने विविध स्लाइडों के माध्यम से काष्ठ आमद से बीड शीट तैयारी पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही भारत सरकार की संस्था एमएसटीसी टीम, रायपुर के द्वारा ई-ऑक्शन प्रकिया पर प्रस्तुतीकरण देकर ऑनलाईन काष्ठ की नीलामी के बारे में बताया गया।


काष्ठ निर्वतन पर  मनोज चंद्राकर उपवनमंडलाधिकारी मैनपुर व बॉस आधारित डिपो कार्यवाही के संबंध में  आई.पी. गेन्द्रे, उपवनमडलाधिकारी पूर्व भानुप्रतापपुर ने भी प्रस्तुतीकरण दिया। काष्ठागार प्रबंधन को उपरोक्त चर्चा-परिचर्चा व प्रश्नोत्तरी के अलावा काष्ठागार नगरी में बने सेक्टरों में रखीं गई काष्ठों को फील्ड विजिट कर कार्यशाला में उपस्थित सभी अधिकारी व कर्मचारियों को काष्ठ के डिमान्सट्रेशन ग्रेडिंग से रूबरू कराया गया। अंत में कार्यशाला का फीडबैक लेकर शंका समाधान किया। जितेन्दर कुमार, संयुक्त वनमंडलाधिकारी नगरी ने उपस्थित उच्चाधिकारियों, राज्य के अन्य जगहों से आये वनमडलाधिकारी, उपवनमडलाधिकारी, काष्ठागार अधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।



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