धमतरी। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अपनी विलक्षण प्रतिभा, ओजस्वी वाणी और अद्भुत अभिनय के माध्यम से देश-विदेश में नई पहचान दिलाने वाली पद्मश्री, पद्म भूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पांडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर धर्मप्रेमी समाजसेवी एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति स्थायी आमंत्रित सदस्य पं. राजेश शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोककला, संस्कृति और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
उन्होंने कहा कि जब भी तीजन बाई मंच पर खड़ी होती थीं, तो ऐसा प्रतीत होता था मानो महाभारत स्वयं जीवंत हो उठा हो। उनके स्वर में भीम का पराक्रम, अर्जुन का धैर्य, द्रौपदी का स्वाभिमान और भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य संदेश एक साथ सुनाई देता था। वे केवल कथा का गायन नहीं करती थीं, बल्कि प्रत्येक पात्र को अपनी सशक्त अभिव्यक्ति से सजीव कर देती थीं। यही कारण है कि उनकी कला ने करोड़ों लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया।
पं. राजेश शर्मा ने कहा कि तीजन बाई ने अपने पूरे जीवन को लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अनगिनत मंचों पर अपनी प्रस्तुति देकर भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्वभर में स्थापित किया। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया जाना उनके असाधारण योगदान का प्रमाण है।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा—
"एक नारी में इतने रूप देखे,
भीम, अर्जुन, द्रौपदी, कृष्ण देखे।
एक स्वर में पूरा महाभारत देखा,
लोककला का अमर इतिहास देखा।
मंच पर जब आप खड़ी होती थीं,
तो पात्र नहीं, पूरा युग जीवित हो उठता था।
आपने पांडवानी नहीं सुनाई,
पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ा।
आज स्वर थम गया है,
पर आपकी गूंज कभी नहीं थमेगी।
जब-जब पांडवानी गाई जाएगी,
हर शब्द में आपका ही अक्स दिखाई देगा।"
पं. राजेश शर्मा ने कहा कि तीजन बाई का जाना केवल एक महान कलाकार का निधन नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उनके व्यक्तित्व, उनकी साधना और उनकी कला की गूंज सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। छत्तीसगढ़ की मिट्टी उनकी ऋणी रहेगी और उनका नाम सदैव श्रद्धा, सम्मान एवं गौरव के साथ लिया जाता रहेगा।




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