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Strike: वेतनमान में वृद्धि, नियमितीकरण जैसे चार सूत्रीय मांगों को लेकर कोटवार संघ का धरना


भूपेंद्र साहू

धमतरी। कई वर्षों से प्रदेश के कोटवार अपनी लम्बित मांगों की पूर्ति हेतु लगातार संघर्ष करते हुए शासन का ध्यान आकर्षित कराते आ रहे हैं। परन्तु कोटवारों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है किसी सिलसिले में अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के कोटवार गांधी मैदान में एक दिन के धरना पर बैठे।


मांगे पूरी नहीं होने पर शासन के इस प्रकार के उदासीन रवैए से प्रदेश के कोटवारों में असन्तोष व्याप्त है, जिसके कारण कोटवारों को बाध्य होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

संघ के जिला अध्यक्ष सुरेश दास मानिकपुरी और संरक्षक राजेंद्र देवदास ने बताया कोटवार का पद आजादी के पूर्व से अनवरत जारी है और वर्तमान में भी अनेक प्रकार से शोषण का शिकार होने के बाद भी प्रदेश के कोटवार पूरी इमानदारी व निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते आ रहे हैं। परन्तु दुर्भाग्यवश अभी तक कोटवारों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है जिसके कारण कोटवारों की स्थिति बहुत ही दयनीय बनी हुई है तथा नाम मात्र की पारिश्रमिक में भी गुजारा करने मजबूर हैं। धरना में एमनदास मानिकपुरी, मोहित अग्रवाल, घनश्याम रायपुरिया, तीरथ कुमार, राजेंद्र कुमार, सुभाष नागरची,श्यामलाल गंधर्व, कोमल सिंह, भगवान  सिंग, जुगल किशोर, पवन नागरची, रोशन दास, सुरेश नागरची, नंदकिशोर कामड़े, धर्मदास मानिकपुरी, धरमू राम नेताम, राजकुमार चालकी, तेज राय देवदास, दीनदयाल, चंद्रपाल,मोहन मरकाम सहित जिले के कोटवार शामिल हुए।


प्रमुख मांगे

नियमितीकरण:पीढ़ी दर पीढ़ी शासन एवं आम जनता की सेवा करने तथा शासन के हर जन कल्याणकारी योजनाओं को ग्रामीण स्तर पर प्रभावशाली ढंग से लागू करवाने में अहम भूमिका निभाने के बाद भी आज तक कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है इसके कारण जीवन पर्यन्त सेवा करने के बाद भी बीमा, पेंशन, ग्रेजविटी जैसे शासन के किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता। कोटवारों को नियमित करते हुए करते हुए उन्हें राजस्व विभाग में सविलियन कर दिया जाए ताकि वृद्धावस्था में कोटवारों को दर दर की ठोकरें न खानी पड़े।

 पारिश्रमिक में वृद्धि:कोटवारों को चार वर्गों में बांट कर उनके पारिश्रमिक का निर्धारण करना अव्यावहारिक एवं विसंगतिपूर्ण व्यवस्था है जबकि सभी कोटवारों की सेवाएं समान ली जाती है। कोटवारों को एक ही वर्ग में रखते हुए उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक भुगतान किया जाए जिसमें कम से कम 15000 मासिक हो।



कोटवार नियुक्ति में मनमानी:आजादी के पूर्व से ही यह परम्परागत रूप से यह व्यवस्था रही है कि कोटवारों के रिक्त पद पर निवृतमान कोटवार के परिवार के सदस्यों को ही कोटवार पद पर नियुक्ति दी जाती रही है, इस प्रक्रिया को जटील बना दिया गया है।कोटवारों की नियुक्ति में मनमानी व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाते हुए पूर्व की परम्परागत व्यवस्था को कायम रखते हुए कोटवार परिवार के सदस्यों को ही कोटवार नियुक्त करने स्पष्ट आदेश जारी किया जावे।


नगरीय निकाय में लगे प्रतिबंध को हटाया जाय:कोटवारों की नियुक्ति ग्रामीण स्तर पर की जाती है परंतु शहरी क्षेत्र के नजदीक के गांव को जब नगर पंचायत या नगर पालिका क्षेत्र में ले लिया जाता है तो वहां कोटवारों के मृत्यु, त्याग पत्र अथवा सेवा निवृत्त होने की स्थिति में कोटवारों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जो की कोटवारों के साथ अन्याय है। वर्तमान में नगर पंचायत या नगरपालिका, निगम में कोटवार नियुक्त नहीं किया जा रहा है जिसके कारण प्रभावित कोटवार परिवार के सदस्यों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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