एसपी भावना पांडेय ने शहीद जवानों के नामों का किया वाचन
धमतरी।पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर रक्षित केंद्र रूद्री में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। जिसमें देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था एवं नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर पुलिस जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने शहीदों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए उनके बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने शहीद जवानों के नामवली का वाचन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों के साहस, त्याग और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा को पुलिस बल की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवान सदैव हमारे प्रेरणास्रोत रहेंगे। उनका सर्वोच्च बलिदान पुलिस बल के प्रत्येक सदस्य को निष्ठा, साहस एवं समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता रहेगा।
शोक शस्त्र के साथ शहीद परेड, वीर जवानों को दी गई सलामी
श्रद्धांजलि समारोह के दौरान ट्रेनी सूबेदार ललिता मरावी,एवं तापेश्वर सिंह राजपूत के नेतृत्व में पुलिस जवानों ने शोक शस्त्र के साथ शहीद परेड कर वीर शहीदों को सलामी दी। उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मौन धारण कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र एवं समाज की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता प्रकट की गई।
154 वीर पुलिस जवानों का स्मरण
इस अवसर पर 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक देशभर में कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए 154 वीर पुलिस जवानों सहित जिले के शहीद जवानों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
शहीद जवानों के परिजनों ने सुनाई अपनी व्यथा
कार्यक्रम के बाद पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय, महापौर रामू रोहरा,अपर कलेक्टर एवं एसडीएम ने शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। शहीद बेटे के नाम स्वास्थ्य केंद्र को रखे जाने की मांग- ग्राम सांकरा नगरी निवासी सत्यभामा साहू ने बताया कि उसका बेटा आदित्य साहू 12 साल पहले नक्सली हमले में शहीद हो गया था। उसके नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नामकरण करने की मांग की है। वह लगातार पत्र व्यवहार कर रही है लेकिन अब तक ना ही स्वास्थ्य केंद्र नहीं स्कूल का नामकरण हो पाया है। पोस्ट ऑफिस से निकलकर सहारा में लगा दिए पैसे- ग्राम भंवरमरा निवासी निर्मला ने बताया कि उसके दो बेटे शहीद हो चुके हैं। पोस्ट ऑफिस में उसके और परिवार के नाम पर 16 लाख रुपए जमा थे जिसे दो युवकों ने निकाल कर सहारा में जमा कर दिया है अब वह पैसा नहीं मिल पा रहा है।बहू को मिल गई नौकरी पिता लाचार- आमगांव निवासी माखन लाल ने बताया कि उसका बेटा चन्द्रहास झीरम घाटी में शहीद हो गया था। इसके बाद उसकी बहू को शासकीय नौकरी मिल गई। नौकरी मिलने के बाद बहू ने दूसरी शादी कर ली, अब उसका कोई सहारा नहीं है। उन्होंने आवेदन देते हुए बहू के नौकरी का आधा तनख्वाह देने की मांग की है।
“शहीदों के चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...”






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